Saturday, 24 December 2011

दिल्ली की सर्दी- हमें सताती है, आपको याद आती है...


पिछले दिनों 'बिग बी' यानी अमिताभ बच्चन साहब का ब्लॉग पढ़ने का मौका मिला। खबरों के जरिए भी पता लगा कि महानायक अमिताभ को दिल्ली की सर्दी बहुत याद आ रही है। खासकर उन्हें अपनी जवानी के दिन याद आ रहे हैं। मुझे भी लग रहा है कि चांदनी चौक के पराठे, बंगाली स्वीट्स के चाट और साउथ एवेन्यू से तीन मूर्ती जाकर बस से कॉलेज जाने तक में ठंड का एहसास उनके मन को आज भी गुलाबी बना देता होगा।

वैसे भी गुलाबी ठंड की दस्तक देते ही दिल्ली का दिल और मूड रोमानी हो जाता है। बहुत से लोगों को इसका इंतजार होता है को कईयों को तरसाती है दिल्ली की सर्दी। खाने पीने के लिए तो दिल्ली वैसे भी मशहूर है और जब ठंडी में गरम चाय पराठे और चाटपटी चाट मिले तो फिर क्या कहना?


बात फिर से बच्च्न साहब की करते हैं। मुंबई में रहते हुए वो जरूर किसी न किसी चीज को मिस करते हैं। अमिताभ ने कहा, ‘वह रोमांच, वह सादगी, वह विश्वास अब सब चला गया। हम रात में अपने घर के दरवाजे और खिड़कियां खोलकर सोते थे। घर के दरवाजे कभी बंद नहीं किए जाते थे। कभी कभी तो हम घर के बाहर या छत पर सोते थे। कोई सुरक्षागार्ड नहीं बस एक बेफिक्र जीवन

क्या कीजिएगा अमिताभ साहब, हम नौजवान अपनी छोटी सी मौज मस्ती भरे पल में कुछ न कुछ रोमांचक तो कर ही लेते हैं। हमारे लिए न सुरक्षा बाधा है और न कोई चार दीवारी, बस उन्मुक्त होकर पंक्षी की तरह जी रहे हैं। हम आपकी स्थिति को समझ सकते है। बड़े लोग बड़ी और कड़ी सुरक्षा में रहते हैं।

यहां दिल्ली में हर मौसम का मजा लिया जा सकता है। हम सर्दी में सिसकियां लेते है, गर्मी में लू भी झेलते हैं और 'रोमांसिग इन द रेन ऑफ देल्ही' का भी मजा चखते हैं। अगर कमरा उपरी मंजिल पर हो तो डांसिंग इन रेन का भी लुफ्त उठाते हैं।

खाने पीने से घूमने तक अब आपको हमेशा याद करेंगे बच्चन साहब। दिल्ली से आपने अपने दिल को जोड़ा इसका धन्यवाद। हम तो अपने दोस्तों के साथ दिल्ली के रेस्त्रां और बाजार संग मॉल का मजा ले रहे हैं। हां अब खुली खाट पर बैठकर तड़के और रोटी वाली थाली यहां नहीं मिलती, इसके लिए दूर तक जाना पड़ता है। कुछ चमक ए.सी और एक दूसरे का हाथ थामे फूड क्लब में जाकर प्रेम में डूबने का मन और मौका मिल ही जाता है।


कितना अच्छा होता अगर आप से पत्र द्वारा त्वरित बात कर पाता, पर अब ब्लॉग का दामन है। इसी पर बोलकर अपने मन की बात कह देता हूं। आशा है आगे भी कुछ दिलचस्प बातों से सामना होगा। अमिताभ साहब की बातों से अब मुझे मेरे मित्र की बात याद आती है, वो हमेशा कहा करता है कि समाज में आपका कद जितना बड़ा होता है, यहां छिपने की जगह उनती ही कम हो जाती है। फिर भी आपने अपने कद और अपनी छाया को कुछ हद तक तो छुपा ही लिया है।

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